भारत में सतत फ़ैशन का उदय
उपभोक्ता पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों और स्थानीय शिल्पकारों को प्राथमिकता देने के कारण भारत में सतत फ़ैशन बढ़ रहा है।
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हाल के वर्षों में, भारत में सतत फ़ैशन एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति के रूप में उभरा है, जो पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति बढ़ती जागरूकता से प्रेरित है। उपभोक्ता अब ऐसे पर्यावरण के अनुकूल कपड़ों के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जो न केवल कचरे को कम करते हैं बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और पारंपरिक शिल्प को भी समर्थन देते हैं। सतत प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करने वाले ब्रांडों की लोकप्रियता बढ़ रही है, जो अक्सर जैविक सामग्रियों और नैतिक उत्पादन विधियों को शामिल कर रहे हैं। उपभोक्ता व्यवहार में यह बदलाव अधिक डिज़ाइनरों को सतत प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे भारत में एक अधिक पर्यावरणीय रूप से जागरूक फ़ैशन उद्योग का योगदान मिल रहा है।
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