भारत में सतत विकास का महत्व
भारत के भविष्य के लिए सतत विकास आवश्यक है, आर्थिक विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करता है।
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जैसे-जैसे भारत आर्थिक रूप से विकसित हो रहा है, सतत विकास की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और सामाजिक असमानता की चुनौतियाँ एक संतुलित दृष्टिकोण की मांग करती हैं जो आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को प्राथमिकता देती हैं। सतत विकास भारत को अपने विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक ढांचा प्रदान करता है, जबकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ ग्रह सुनिश्चित करता है। नीति निर्माताओं को नवीकरणीय ऊर्जा, कुशल संसाधन प्रबंधन और समावेशी विकास रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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